सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक दुकानों के स्टे ऑर्डर निरस्त, जांच समिति की पर रोक

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगाने के संबंध में दलीलें दी गईं। इस दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले सभी राहत आदेश (स्टे ऑर्डर) निरस्त कर दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन की ओर से पेश अधिवक्ता को भी कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के सांतर किसी अन्य प्रक्रिया या जांच समिति के माध्यम से कार्रवाई को प्रभावित नहीं किया जा सकता।नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि निगम अवैध निर्माण और व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ कार्रवाई करना चाहता है, लेकिन विभिन्न स्तरों पर बाधाओं के कारण प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून के पालन में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

अब तेज होगी कार्रवाईसुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद यह माना जा रहा है कि राजधानी में आवासीय भूखंडों पर संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई फिर से तेज होगी। कोर्ट ने साफ संकेत दिए कि अवैध निर्माण और भूमि उपयोग के उल्लंघन के मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई जारी रखी जाए। इसके बाद गुरुवार को नगर निगम ने कार्रवाई को लेकर नया प्लान तैयार किया।

मास्टर प्लान और टैक्स को लेकर गरमाई सियासत: कांग्रेसियों ने भोपाल नगर निगम दफ्तर का किया घेराव और पुतला दूंकाभोपाल के लिंक रोड नंबर-2 स्थित नगर निगम दफ्तर का गुरुवार को कांग्रेसियों ने जोरदार घेराव किया और मुख्य गेट पर निगम का पुतला दहन किया।दुपहर 1:30 बजे निगम मुख्यालय का घेराव करने पहुंचे कांग्रेसियों ने जमकर नारेबाजी की। करीब पौने घंटे तक प्रदर्शन किया गया। इस दौरान पूर्व मंत्री पी शर्मा ने कहा कि भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट में राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक भी लगा दी गई है, क्योंकि इस मामले में नगर निगम बेहतर तरीके से अपना पक्ष नहीं रख सका।

कांग्रेस नेताओं के प्रमुख आरोप और माँगे:25 साल से बिना मास्टर प्लान का शहर: पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि भोपाल पिछले 25 वर्षों से बिना मास्टर प्लान के चल रहा है। सरकार तुरंत मास्टर प्लान लागू करे और व्यापारियों को राहत दे।कमर्शियल टैक्स पर सवाल: कांग्रेस पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने सवाल उठाया कि जब अरेरा कॉलोनी, 10 नंबर, बावड़ियाकलां समेत पूरे शहर में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां अवैध हैं, तो फिर नगर निगम सालों से कमर्शियल टैक्स क्यों वसूल रहा है? यदि नियम नहीं है तो निगम तुरंत व्यापारियों को कमर्शियल टैक्स की राशि वापस करे।मिक्स्ड लैंड यूज़ लागू हो: कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नगर निगम की गलती की वजह से आज व्यापारियों को दुकानबंदी और तालाबंदी का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए तत्काल राहत देने के लिए शहर में ‘मिक्स्ड लैंड यूज़’ (मिश्रित भूमि उपयोग) व्यवस्था लागू की जाए।अधिवक्ता पर प्रतिक्रिया: कांग्रेस नेता शोएब खान ने कहा कि यदि निगम सही ढंग से अपना पक्ष रखता तो बड़ी राहत मिल सकती थी, इसी के चलते आज पुतला दहन किया गया।

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