बारिश में टूटे 24 मकान, मलबे में दबा सामान… अब उठी पुनर्वास की बड़ी मांग
भोपाल के नारियलखेड़ा इलाके में हालिया प्रशासनिक कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के सामने राहत और पुनर्वास का सवाल खड़ा हो गया है। बारिश के बीच कई परिवारों के मकान टूटने से उनका जरूरी सामान मलबे में दब गया। प्रभावित लोगों के स्कूल बैग, कपड़े, फर्नीचर, दस्तावेज और दवाइयां तक मलबे में दबने की बात सामने आई है।
इसी मामले को लेकर ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल, मध्य प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित परिवारों का सर्वे कराने, तत्काल राहत उपलब्ध कराने और पात्र परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था पर विचार करने की मांग रखी।
मलबे में दबे दस्तावेज और जरूरी सामान
मिल्ली काउंसिल के जनरल सेक्रेटरी उमर असलम के मुताबिक, नारियलखेड़ा में कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों से संपर्क कर स्थिति का जायजा लिया गया। बारिश के मौसम में मकान टूटने से कई गरीब परिवारों के सामने रहने की समस्या पैदा हुई है।
काउंसिल का कहना है कि कई परिवारों का जरूरी सामान और महत्वपूर्ण दस्तावेज मलबे में दब गए हैं। दस्तावेज नष्ट होने के कारण उनकी प्रमाणित प्रतियां निकलवाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वक्फ जमीन की जांच और पुनर्वास की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने नारियलखेड़ा और आसपास की वक्फ संपत्तियों की खाली जमीन तथा खसरों की स्थिति की जांच कराने की मांग की है। काउंसिल ने वक्फ बोर्ड के सामने खसरा नंबर 127, 88 और 86 का भी उल्लेख किया और इन जमीनों के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने की मांग रखी।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, पात्र प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए उपलब्ध वक्फ जमीन पर वैकल्पिक आवास की संभावना भी देखी जानी चाहिए।
सनवर पटेल ने अधिकारियों को दिए निर्देश
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने कहा कि नारियलखेड़ा में करीब 24 मकानों को कोर्ट के आदेश के बाद हटाया गया है। उन्होंने प्रभावित गरीब और जरूरतमंद परिवारों की स्थिति को मानवीय संवेदना का विषय बताते हुए अधिकारियों को मामले की कानूनी स्थिति देखने के निर्देश दिए।
पटेल के मुताबिक, वक्फ बोर्ड कानून के दायरे में बंधा हुआ है और वक्फ संपत्ति का उपयोग उसकी निर्धारित मंशा के अनुसार ही किया जा सकता है। यदि किसी वक्फ संपत्ति की आय जरूरतमंदों की मदद के लिए निर्धारित है, तो कानून के तहत उस उद्देश्य से सहायता की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
जनप्रतिनिधियों से भी पहल की मांग
कांग्रेस नेता मोहम्मद जहीर ने कहा कि नारियलखेड़ा उत्तर विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है और प्रभावित परिवारों के प्रति स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने वक्फ बोर्ड में जनप्रतिनिधियों की भूमिका के चलते मामले में सक्रिय पहल की उम्मीद जताई।
काउंसिल ने वक्फ बोर्ड से प्रभावित परिवारों का सर्वे, तत्काल राहत और पुनर्वास प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की मांग की है। साथ ही जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी समाधान तलाशने की अपील की गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि बारिश के बीच बेघर हुए इन परिवारों के पुनर्वास के लिए प्रशासन और संबंधित संस्थाएं क्या कदम उठाती हैं।

